भारत ही नहीं बल्कि इन देशों में भी मनाया जाता है मकर संक्रांति का पर्व, …जानिए

सम्पूर्ण भारत में मकर संक्रान्ति का त्योहार विभिन्न रूपों में मनाया जाता है। देश के सभी राज्यों में इस त्योहार को मनाने के जितने अधिक रूप प्रचलित हैं उतने किसी अन्य त्योहार के लिए नहीं। यह त्योहार सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि कई अन्य देशों में भी मनाया जाता है। यह पर्व वस्तुत: कृषि से जुड़ा त्योहार है जिसमें किसान अपनी अच्छी फसल के लिये भगवान को धन्यवाद देकर अपनी अनुकम्पा को सदैव लोगों पर बनाये रखने का आशीर्वाद मांगते हैं। इसलिए मकर संक्रान्ति के त्यौहार को फसलों एवं किसानों के त्यौहार के नाम से भी जाना जाता है।

मकर संक्रान्ति हिन्दुओं का प्रमुख पर्व है। पौष मास में जब सूर्य धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करता है तो दक्षिणायन से उत्तरायण होता है और मकर संक्रांति के दिन से ही सूर्य की किरणें धीरे-धीरे ऊ्ष्ण होने लगती हैं। यह त्योहार जनवरी माह के चौदहवें या पन्द्रहवें दिन मनाया जाता है।

भारत में मकर संक्रांति के नाम:
– तमिलनाडु में-ताइ पोंगल, उझवर तिरुनल
– गुजरात, उत्तराखण्ड में-उत्तरायण
– हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, पंजाब में-माघी, लोहड़ी
– असम में-भोगाली बिहु

– कश्मीर घाटी में- शिशुर सेंक्रात
– उत्तर प्रदेश और पश्चिमी बिहार में-खिचड़ी
– पश्चिम बंगाल में-पौष संक्रान्ति
– कर्नाटक में-मकर संक्रमण

विदेशों में मकर संक्रांति के नाम:
– बांग्लादेश में- शक्रायण/ पौष संक्रान्ति
– नेपाल में- माघे सङ्क्रान्ति/ ‘माघी सङ्क्रान्ति/’खिचड़ी सङ्क्रान्ति’
– थाईलैण्ड में- सोङ्गकरन

– लाओस में- पि मा लाओ
– म्यांमार में- थिङ्यान
– कम्बोडिया में- मोहा संगक्रान
– श्री लंका में- पोंगल, उझवर तिरुनल

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मकर संक्रान्ति का महत्व
शास्त्रों के अनुसार, दक्षिणायण को देवताओं की रात्रि अर्थात् नकारात्मकता का प्रतीक तथा उत्तरायण को देवताओं का दिन अर्थात् सकारात्मकता का प्रतीक माना गया है। इसीलिए इस दिन जप, तप, दान, स्नान, श्राद्ध, तर्पण आदि धार्मिक क्रियाकलापों का विशेष महत्व है। ऐसी धारणा है कि इस अवसर पर दिया गया दान सौ गुना बढ़कर पुन: प्राप्त होता है। इस दिन शुद्ध घी एवं कम्बल का दान मोक्ष की प्राप्ति करवाता है।